October 5, 2022

बाहर बिक सकती है शराब लेकिन भैरव नाथ को चढ़ाई नहीं जा सकती

विश्व प्रसिद्ध कालभैरव मंदिर आने वाले श्रद्धालु इन दिनों हैरान हैं। वे भगवान को भोग के लिए मंदिर के बाहर सरकारी दुकान से शराब तो खरीद सकते हैं लेकिन भगवान को चढ़ा नहीं सकते। कारण लॉकडाउन की गाइडलाइन के मुताबिक शराब खरीदने पर को छूट है, लेकिन मंदिर में चढ़ाने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।

यहां बाहर से आने वाले हर श्रद्धालु इस विचित्र स्थिति से जूझ रहे हैं। यहां भगवान कालभैरव को मदिरा का भोग चढ़ाया जाता है। आम दिनों में भी श्रद्धालु मदिरा खरीदकर भगवान को अर्पित करते हैं। लेकिन कोरोना संक्रमण को देखते हुए फिलहाल प्रशासन ने इस पर रोक लगा दी है। दूसरी ओर मंदिर के बाहर आबकारी विभाग के काउंटर पर मदिरा बेची जाती है।

श्रद्धालु खरीदकर होते हैं निराश

बाहर से आने वाले श्रद्धालु आबकारी विभाग के काउंटर से मदिरा तो खरीद लेते हैं, लेकिन मंदिर में उन्हें मदिरा की बोतल लेकर प्रवेश करने नहीं दिया जाता है। वे इस दौरान परेशान होते हैं। क्योंकि लॉकडाउन की गाइडलाइन के अनुसार मंदिर में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन के साथ ही मंदिर में मदिरा चढ़ाने पर प्रतिबंध लगा रखा है। कई बार मंदिर के द्वार पर श्रद्धालु बहस करते भी नजर आ रहे हैं। वे मंदिर प्रशासन समेत प्रबंधन के अधिकारियों और कर्मचारियों से नाराज हो रहे हैं।

ऐसे बोर्ड लगाए

हालांकि प्रशासन ने मंदिर परिसर में कुछ स्थानों पर इसकी सूचना लगाई है, लेकिन मंदिर परिसर के बाहर जहां श्रद्धालु अपने वाहन पार्क करते हैं, वहां इसकी सूचना नहीं मिलने से उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। श्रद्धालुओं का कहना है कि बाहर हमें खरीदने के वक्त ही बता दिया जाना चाहिए। या यदि बाहर मदिरा बेची जा रही है तो हमें चढ़ाने की भी अनुमति मिलना चाहिए। यह नियम श्रद्धालुओं की भावनाओं को ढेस पहुंचाता है। इधर, प्रशासन के एक बड़े अफसर का कहना है कि काल भैरव मंदिर में मदिरा चढ़ाने पर फिलहाल प्रतिबंध है। मंदिर के बाहर मदिरा बेचने के मामले में जल्दी ही स्थिति स्पष्ट कर दी जाएगी।

भैरव रोज पी जाते हैं कई लीटर शराब

कालभैरव मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां भगवान की प्रतिमा साक्षात रूप में मदिरा पान करती है। काल भैरव को मदिरा प्रसाद के रूप में चढ़ाई जाती है। जैसे ही शराब से भरे प्याले भैरव की मूर्ति के मुंह से लगाते हैं, तो देखते ही देखते वे खाली हो जाते हैं। दिनभर में यह प्रतिमा हजारों लीटर शराब पी जाती है, भक्तों द्वारा पिलाई जाने वाली शराब आखिर कहां जाती है, यह रहस्य किसी को नहीं पता।