October 5, 2022

इंदौर में भाजपा मंडल अध्यक्ष नमित नरूला गिरफ्तार, फर्जी हस्ताक्षर करने का आरोप

भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव, पश्चिम बंगाल के प्रभारी एवं इंदौर के सबसे प्रभावशाली भाजपा नेता श्री कैलाश विजयवर्गीय और विधायक श्री रमेश मेंदोला का समर्थक भाजपा मंडल अध्यक्ष श्री नमित नरूला को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस का आरोप है कि नमित नरूला ने सरकारी दस्तावेजों पर एसडीएम के फर्जी हस्ताक्षर किए हैं।

इंदौर पुलिस द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार SDM सोहन कनास की शिकायत पर शुरू हुई कार्रवाई में सबसे पहले निगमकर्मी अंकित सतीशचंद्र तिवारी को गिरफ्तार किया था। अंकित नर्मदा प्रोजेक्ट जोन-2 में कंप्यूटर ऑपरेटर (दैनिक वेतनभोगी) की नौकरी करता था। पूछताछ में अंकित ने बताया कि जाली अनुमति दोस्त नमित पुत्र विजय नरूला की मदद से बनाता था। पुलिस उसके घर स्कीम-54 पहुंची लेकिन वह फरार हो गया। एएसपी (पश्चिम-2) मनीष खत्री ने उसकी लोकेशन निकाली तो उज्जैन रोड की निकली। तत्काल टीमें रवाना हुई और नमित को उज्जैन के आगर रोड से पक़़ड लिया। 

थाना और कलेक्टर कार्यालय के नाम से रुपये लेते थे जालसाज

आरोपित नमित नरूला भाजपा का मंडल अध्यक्ष है। वह महिला पार्षद और राष्ट्रीय स्तर के नेताओं का भी करीबी है। पूछताछ में बताया कि एसडीएम कार्यालय से ट्यूबवेल के आवेदन अनुशंसा के लिए नर्मदा प्रोजेक्ट कार्यालय भेजे जाते थे। अंकित प्रक्रिया और सत्यापन के बहाने फाइल अटका देता था। परेशान आवेदकों से अंकित रिश्वत मांगता और बोलता कि उसे अफसरों को घूस देनी पड़ेगी। वह एक अनुमति के लिए 25 हजार रपये लेता और फाइल नमित के सुपुर्द कर देता था। नमित आवेदकों को कलेक्टोरेट कार्यालय बुलाकर अनुमति देता था। वह बोलता था कि अनुमति के लिए थाना और कलेक्टोरेट से सत्यापन होता है। उसको सब जगहों पर रपये बांटने पड़ते हैं।

यह आरोप भी लगते रहते हैं कि शहर में बोरिंग माफिया भी अनुमति और ट्यूबवेल करवाने के ठेके लेते हैं। इस गिरोह में शामिल दलालों का संपर्क थानों की खुफिया विंग, टीआइ और बीट प्रभारियों से रहता है। ज्यादातर ट्यूबवेल लसू़ि़डया, विजयनगर, कना़ि़डया, राजेंद्रनगर, बाणगंगा और एरोड्रम क्षेत्र में होते हैं। इसके लिए 25 से 75 हजार रपये तय हैं। 

कई बार आवेदक थाने पर सीधे बातचीत कर ट्यूबवेल मशीन लगवा लेते हैं। दलाल और बोरिंग माफिया कंट्रोल रूम व एसडीएम को कॉल कर मशीन जब्त करवा देते हैं। पुलिस अब मामले पर पर्दा डालने में लग गई है। आरोपितों द्वारा थानों में दी गई अनुमतियां जब्त की न उन लोगों को बुलाया, जिन्होंने ट्यूबवेल खुदवाए थे।