February 29, 2024

पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव ने राहुल गांधी को कांग्रेस की कमान सौंपने की मांग उठाई

सोमवार को होने वाली कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक से पहले कांग्रेस में नेतृत्व को लेकर नेताओं के सुर मुखर होने लगे हैं। कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक में यह तय हो गया है कि सोनिया गांधी अब अध्यक्ष पद पर नहीं रहेगी। सोनिया गांधी के बाद कांग्रेस की कमान किस हाथ में होगी, इसको लेकर कशमकश के हालात हो गए हैं।

लेकिन मध्य प्रदेश से कांग्रेस की कमान राहुल गांधी के हाथों में दिए जाने को लेकर आवाज उठी है। कांग्रेस वर्किंग कमेटी के सदस्य और पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव ने राहुल गांधी को कांग्रेस की कमान सौंपने की मांग उठाई है। अरुण यादव ने राहुल गांधी को अपनी जिद छोड़ कर पूर्णकालिक अध्यक्ष बनाए जाने की मांग उठाई है। अरुण यादव ने ट्वीट कर कहा है कि देश भर के करोड़ों कार्यकर्ता बब्बर शेर की तरह काम कर सकें, इसके लिए राहुल गांधी को ही अध्यक्ष पद की कमान सौंपी जानी चाहिए।

दिग्विजय सिंह ने भी राहुल की वकालत

दिग्विजय सिंह ने भी राहुल गांधी को अध्यक्ष बनाए जाने की वकालत की है। दिग्विजय सिंह ने कहा है कि राहुल गांधी को जिद छोड़कर अध्यक्ष पद स्वीकार करना चाहिए। कांग्रेस कार्यकर्ता और किसी का नेतृत्व स्वीकार नहीं करेगा। यह समय कांग्रेस के एकमत होने का है। नेहरू गांधी परिवार के बिना कांग्रेस की कल्पना नहीं हो सकती है।

पूर्व मंत्री जीतू पटवारी ने भी राहुल गांधी के पक्ष में ट्वीट कर लिखा है मुझे गर्व है कि मेरे नेता राहुल गांधी हैं। कांग्रेस के विधायक कुणाल चौधरी ने भी राहुल गांधी के समर्थन में ट्वीट कर कार्यकर्ताओं की आस राहुल गांधी के नेतृत्व में होने की बात कही है।

पार्टी की कमान के लिए कई सीनियर नेताओं के नाम चर्चा में

दरअसल कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक में यह तय है कि सोनिया गांधी अध्यक्ष पद से इस्तीफा देंगी। लेकिन इसके बाद कांग्रेस की कमान किस हाथ में होगी, इसको लेकर पार्टी के अंदर कयासबाजी तेज हो गई है। हालांकि पार्टी में कई सीनियर नेताओं के नाम तेजी के साथ सामने आए हैं। इनमें मुकुल वासनिक, दिग्विजय सिंह, पी चिदंबरम समेत कई नेताओं के नाम हैं।

लेकिन प्रदेश कांग्रेस की मंशा है कि कांग्रेस की कमान राहुल गांधी के हाथों में ही होना चाहिए। अब देखना यह है कि कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक में क्या फैसला होता है। कांग्रेस की कमान एक बार फिर गांधी परिवार के हाथ में होती है या फिर बीजेपी के आरोपों का जवाब देने के लिए कांग्रेस किसी गैरगांधी को पार्टी की कमान सौंपती है।

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