March 5, 2024

भाजपा में अंतरकलह का माहौल, सिंधिया थामेंगे प्रचार कमान, नरोत्तम मिश्रा नहीं आएँगे नज़र

  • विधानसभा उपचुनाव को लेकर बीजेपी ने तीन दिन के सदस्यता ग्रहण में नरोत्तम दिखे नहीं थे, इसको लेकर कई सवाल उठ रहे हैं।

ग्वालियर-चंबल संभाग में भारतीय जनता पार्टी के चुनाव प्रचार अभियान कर दिया है। इसमें मुख्यमंत्री से लेकर प्रदेश के तमाम बड़े चेहरों के साथ-साथ अंचल के तमाम बड़े नेता नजर आ रहे हैं। लेकिन बीजेपी के संकट मोचक कहे जाने वाले नरोत्तम मिश्रा का नाम प्रचारकों की लिस्ट से नदारद है। इसे लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेजी से चल रही है कि क्या बीजेपी में सबकुछ ठीक नहीं है? वहीं कांग्रेस ने बीजेपी पर चुटकी ली और कहा कि सिंधिया की वजह से नरोत्तम मिश्रा के साथ ऐसा किया जा रहा है।

दूरी बना रहे या दूर किया जा रहा?

हालांकि लोगों के बीच इस बात की भी चर्चा है कि नरोत्तम मिश्रा इन कार्यक्रमों से दूरी बना रहे हैं या फिर उन्हें जानबूझकर दूर रखा जा रहा है। जिस तरीके से ग्वालियर-चंबल संभाग की 16 सीटों पर होने वाले उपचुनाव को लेकर बीजेपी ने तीन दिन के सदस्यता ग्रहण अभियान का आयोजन किया था। इसमें उपचुनाव की सीटों वाले इलाकों के नेताओं के साथ-साथ अन्य सीटों के कार्यकर्ताओं को भी कांग्रेस से बीजेपी में शामिल कराया गया था। इस दौरान बीजेपी के तमाम बड़े नेता जिनमें पूर्व मंत्री जयभान सिंह पवैया, माया सिंह, अनूप मिश्रा, लाल सिंह आर्य और अन्य पूर्व विधायक इन कार्यक्रमों में शामिल हुए, लेकिन नरोत्तम मिश्रा कहीं नहीं दिखे थे. या यूं कहें कि नरोत्तम मिश्रा का नाम प्रचारकों में नहीं था।

कांग्रेस का तंज- दिख रही बीजेपी की गुटबाजी

इस मुद्दे ने कांग्रेस को बैठे-बैठे बीजेपी की एकजुटता पर निशाना साधने का मौका दे दिया। कांग्रेस प्रदेश प्रवक्ता आरपी सिंह ने कहा कि यह सब चीजें बताती हैं कि बीजेपी कांग्रेस में गुटबाजी का आरोप लगाती है, लेकिन सच तो यह है कि उनकी पार्टी में गुटबाजी है। जब से सिंधिया कांग्रेस छोड़ बीजेपी में शामिल हुए हैं तब से वह पावर का तीसरा सेंटर बन गए हैं।

सिंधिया के आगे नरोत्तम को तवज्जो क्यों?

कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि यह सिंधिया-नरोत्तम एक ही इलाके से आते हैं। ऐसे में पावर बैलेंस होने में दिक्कत हो रही है। यही कारण है कि नरोत्तम कार्यक्रमों से दूरी बनाए हुए हैं। उन्होंने कहा कि अंचल की जिन 16 सीटों पर उपचुनाव होने हैं, उन पर सिंधिया समर्थक चुनाव लड़ेंगे। यही कारण है कि बीजेपी नरोत्तम मिश्रा से ज्यादा सिंधिया को तवज्जो दे रही है।

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