October 2, 2022

जबलपुर हाईकोर्ट ने कहा – कोरोना के इलाज को कमाई का ज़रिया नहीं बना सकते निजी अस्पताल

  • हाई कोर्ट ने यह तल्ख टिप्पणी उस याचिका की सुनवाई के दौरान की जिसमें शाजापुर के एक निजी अस्पताल ने पैसे ना चुकाने पर 80 वर्ष के एक बुजुर्ग को पलंग से बांध दिया था।

मध्य प्रदेश के जबलपुर हाई कोर्टने कोरोना बीमारी के इलाज को लेकर निजी अस्पतालों पर तल्ख टिप्पणी की है। हाई कोर्ट ने उस याचिका की सुनवाई के दौरान ये टिप्पणी की, जिसमें शाजापुर के एक निजी अस्पताल ने पैसे ना चुकाने पर 80 वर्ष के एक बुजुर्ग को पलंग से बांध दिया था। सुप्रीम कोर्ट के सेक्रेटरी जनरल डॉ. अश्वनी कुमार द्वारा सुप्रीम कोर्ट को पत्र भेजकर शाजापुर के निजी अस्पताल में बिल का भुगतान न होने पर एक बुजुर्ग को बंधक बनाकर रखे जाने का आरोप लगाया था, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने मामला मध्य प्रदेश हाई कोर्ट को भेजा था और यहां इसकी सुनवाई जनहित याचिका पर के रूप में की जा रही है।

याचिका की सुनवाई के दौरान दो हस्तक्षेप याचिकाएं भी दायर कर दी गईं। यह हस्तक्षेप याचिकाएं कोरोना के इलाज के लिए निजी अस्पतालों द्वारा इलाज की दरों के निर्धारण और राज्य सरकार द्वारा इस मसले पर गाइडलाइन बनाने के लिए दायर की गई हैं। सुनवाई के दौरान मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस अजय कुमार मित्तल और जस्टिस सुजय पाॅल की युगल पीठ ने निजी अस्पतालों को लेकर टिप्पणी की है। वहीं अदालत मित्र के सुझाव पर राज्य सरकार, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन और नर्सिंग होम एसोसिएशन से अपना पक्ष रखने के निर्देश दिए हैं।

कोई भी मरीज इलाज से वंचित न हो

गौरतलब है कि मध्य प्रदेश हाई कोर्ट निजी अस्पतालों के लिए गाइडलाइंस बनाए जाने की मंशा रखता है। अदालत का मानना है कि पैसों के अभाव में कोई भी मरीज इलाज से ना वंचित हो इस और सरकार दिशा निर्देश तैयार करें। इस पूरे मामले में अधिवक्ता नमन नागरथ अदालत मित्र के रुप में अपने सुझाव दे रहे हैं। पूरे मामले पर अगली सुनवाई आने वाले सोमवार यानी 7 सितंबर को नियत की गई है।