October 4, 2022

सांसद दिग्विजय सिंह ने राज्यसभा में ऑक्सीजन की कमी का मुद्दा उठाया

  • कहा – देश में ऑक्सीजन की कालाबाजारी, ऑक्सीजन की कमी से हो रही मरीजों की मौत

राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने राज्यसभा में कोरोना पर चर्चा के दौरान ऑक्सीजन की कमी का मुद्दा उठाया। उन्होंने ऑक्सीजन सिलेंडर के लगातार बढ़ते दामों और इसकी वजह से एमपी के देवास सहित अन्य स्थानों पर कोरोना मरीज़ों की मौत का ज़िक्र करते हुए कहा कि ऑक्सीजन सिलेंडर के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। सरकार आवश्यक वस्तु अधिनियम को बदल रही हैं। ऑक्सीजन सिलेंडर को भी इसके अंतर्गत लाया जाना चाहिए।

सांसद दिग्विजय सिंह ने कहा कि कोरोना के इलाज के लिए ऑक्सीजन बेहद महत्वपूर्ण है। लेकिन महामारी के पहले ऑक्सीजन की कीमत 10 रुपये प्रति घन मीटर थी जो अब बढ़कर 50 रुपये प्रति घन मीटर हो गई है। जबकि इसकी क़ीमत की अधिकतम सीमा 17 रुपए प्रति घन मीटर तय की गई थी। आंध्र प्रदेश और तेलंगाना सहित देश में प्रायवेट अस्पताल इससे कहीं ज़्यादा पैसा वसूल रहे हैं। एमपी के देवास में ऑक्सीजन की कमी के कारण चार लोगों की मौत हो गई है। 

देवास, दमोह, जबलपुर, छिंदवाड़ा में ऑक्सीजन नहीं मिल रही है।ऑक्सीजन नहीं मिलने से लोग मरने की कगार पर पहुंच गए हैं। यूपी में जो छोटा सिलेंडर 130 रुपए में आता था वह 350 रुपए में बिक रहा है। ऑक्सीजन लेने पर लिए जाने वाली सिक्यूरिटी राशि को पांच हजार से बढ़ा कर दस हज़ार कर दिया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राज्य गुजरात में ऑक्सीजन की क़ीमत 8.50 रुपए प्रति लीटर थी। यह अब बढ़ कर 28 रुपए तक हो गई है। उड़ीसा में एक सिलेंडर साढ़े छह हज़ार में आता था अब दस हज़ार में आ रहा है। सभी राज्यों में ऑक्सीजन की क़ीमत बढ़ती जा रही है। 

उन्होंने कहा कि लोग परेशान हैं। सरकार को ऑक्सीजन की कालाबाजारी रोकने के लिए सख्त कदम उठाने चाहिए। आवश्यक वस्तु अधिनियम को बदलने के समय में ऑक्सीजन पर सीलिंग लागू करनी चाहिए। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री पर निशाना साधते हुए सिंह ने कहा कि स्वास्थ्य मंत्री ने अपने पांच पेज जितने लंबे भाषण में प्रधानमंत्री का तो बार बार उल्लेख किया मगर ऑक्सीजन की कमी की बात नहीं की। मैं इसकी निंदा करता हूं। 

ग़ौरतलब है कि देश में कोरोना के आंकडे लगातार बढ़ रहे हैं, 17 जुलाई को कोरोना मामले 10 लाख तक पहुंचे थे, जो फिर 7 अगस्त को 20 दिनों में 20 लाख हो गए। ये आकंड़े 23 अगस्त को 30 लाख, 5 सितंबर को 40 लाख के पार और फिर 11 दिनों में आखिरकार कुल मामले 50 लाख तक पहुंच गए। महाराष्ट्र में 10,97,856 मामलों के साथ सबसे ज्यादा प्रभावित राज्य बना हुआ है, जिसमें 30,409 मौतें शामिल हैं। इसके बाद आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, कर्नाटक और उत्तर प्रदेश हैं।