March 5, 2024

पूर्व सीएम कमल नाथ ने कहा – कृषि विधेयक पर अपना रुख स्पष्ट करें शिवराज, जनता जानना चाहती है कौन किसके साथ है

केंद्र सरकार के कृषि विधेयकों के खिलाफ संसद से लेकर सड़क तक विरोध जारी है। कृषि अध्यादेश के खिलाफ रविवार को संसद के ऊपरी सदन में विरोध करने वाले 8 सांसदों को निलंबित कर दिया गया है। इसी बीच मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ ने राज्य के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को केंद्र सरकार के कृषि विधेयकों के समर्थन में हैं या खिलाफ में। कमल नाथ ने कहा है कि प्रदेश का किसान यह जानना चाहता है कि आखिर कौन उसके साथ है और कौन काले क़ानून के साथ है।

  • शिवराज सरकार स्पष्ट करे कि वो किसानो के साथ है या इन किसान विरोधी काले क़ानून के साथ ?
  • प्रदेश का किसान इस सच्चाई को जानता चाहता है कि कौन उसके साथ है और कौन किसान विरोधी काले क़ानून के साथ ?

कमल नाथ ने ट्वीट किया है कि ‘शिवराज सरकार स्पष्ट करे कि वो किसानो के साथ है या इन किसान विरोधी काले क़ानून के साथ ?प्रदेश का किसान इस सच्चाई को जानता चाहता है कि कौन उसके साथ है और कौन किसान विरोधी काले क़ानून के साथ ?’   

किसानों की रोज़ी रोटी छीनने पर तुली हुई है बीजेपी सरकार 

पीसीसी चीफ कमल नाथ ने केंद्र सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा है कि बीजेपी सरकार किसानों की रोज़ी रोटी छीनने पर तुली हुई है। कमल नाथ ने कहा है कि एक तरफ बीजेपी किसानों की आय दोगुनी करने का वादा कर रही थी लेकिन आज बीजेपी किसानों की रोज़ी रोटी तक छीनना चाहती है। कमल नाथ ने कहा है कि कांग्रेस केंद्र सरकार के काले क़ानून का सदन से लेकर सड़क तक पूरज़ोर विरोध करेगी और साथ ही  किसानों के समर्थन में कांग्रेस अपना संघर्ष भी जारी रखेगी।

  • पुरानी ज़मींदारी प्रथा वापस लाना चाहती है।
  • वादा किसानो की आय दोगुनी का किया था लेकिन भाजपा सरकार किसानो की रोज़ी- रोटी छिनना चाहती है।
  • देश भर के किसानो की इस लड़ाई को कांग्रेस लड़ेगी।
  • सदन से लेकर सड़क तक कांग्रेस किसानो के हित में इस काले क़ानून के विरोध में संघर्ष करेगी।

देश को तानाशाही तरीके से चलाना चाहती है मोदी सरकार 

पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ ने केंद्र की मोदी सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा है कि वो देश को तानशाही तरीके से चलाना चाहती है। कमल नाथ ने कहा कि ‘मोदी सरकार के अध्यादेश पूरी तरह से किसान विरोधी व खेतिहर मज़दूर विरोधी है। यह दिन इतिहास में काले दिवस के रूप में दर्ज होगा।इसको लेकर ना किसानो की सहमति ली गयी ना अन्य राजनैतिक दलो से चर्चा की गयी।मोदी सरकार तानाशाही तरीक़े से देश को चलाना चाहती है।’

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