October 2, 2022

मध्यप्रदेश में पोषण आहार योजना में करोडों का घोटाला, कंप्यूटर ऑपरेटर्स के खातों में डाला आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का पैसा

  • शिवराज चौहान सरकार में हुआ हेरफेर का खेल।
  • 2014 से 2016 के बीच हुए घोटाले का कैग ने किया भंडाफोड़।

नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) ने मध्यप्रदेश में पोषण आहार मामले में बड़े घोटाले का भंडाफोड़ किया है। कैग ने बताया है कि मई 2014 से दिसंबर 2016 के बीच भोपाल और रायसेन के परियोजना अधिकारियों ने आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के लगभग 3.19 करोड़ रुपयों को कंप्यूटर ऑपरेटर्स और डेटा एंट्री ऑपरेटर्स समेत अन्य के 89 बैंक खातों में जमा करवाया है। 

सीएजी रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि साल 2014-15 से लेकर 2017-18 के दौरान आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को 6 हजार रुपए मानदेय राशि के रूप में दिया जाता था। हालांकि संबंधित बैंक खातों में एक लाख तेरह हजार रुपए तक मानदेय राशि के रूप में दिए हैं। हैरान करने वाली बात यह है कि भोपाल की एक परियोजना अधिकारी सुधा विमल भी मोतियापार्क में आंगनवाड़ी सेविका के रूप में दर्ज थी। उनके खाते में बैरसिया, बरखेड़ी, चांदबड़, गोविंदपुरा और रायसेन के कई अधिकारियों का पैसा जमा था।

रिपोर्ट के मुताबिक सितंबर 2016 से लेकर अगस्त 2018 तक भोपाल के जिला कार्यक्रम अधिकारी ने 44 बैंक खातों में 39.61 लाख रुपए गलत तरीके से जमा किए जिनमें से 23 खातों में परियोजना अधिकारियों ने भी पैसा जमा करवाया। जांच एजेंसी ने बताया कि भोपाल डीपीओ ने बच्चों को दिए जाने वाले फ्लेवर्ड मिल्क का भुगतान 4 लाख 73 हजार रुपए जिस तिथि को किया उसी दिन और क्रमांक से 14 लाख एक हजार रुपयों का भी भुगतान हुआ। मामले पर जब कैग ने डीपीओ से जानकारी चाही तो उन्होंने कहा कि फर्जी हस्ताक्षर से किसी ने ऐसा किया होगा। 

इसके अलावा सीएजी को झाबुआ, मुरैना, विदिशा और अलीराजपुर के दस्तावेजों से पता चला है कि मानदेय का 65 लाख 72 हजार रुपए अवैध तरीके से निकाला गया है। इन रुपयों को आंगनवाड़ी सेविकाओं के नाम पर जिन बैंक खातों में जमा कराया गया है वह कर्मचारियों के परिजनों और फर्मों के नाम पर थे।