April 14, 2024

बीजेपी सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया और कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने की ग्वालियर में मुलाकात

बीजेपी सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया और कांग्रेस नेता सचिन की ग्वालियर में मुलाकात हुई है। ग्वालियर आने पर राजस्थान के पूर्व डिप्टी सीएम पायलट का सिंधिया ने स्वागत किया है। इस बात की पुष्टि खुद सिंधिया ने की है। मध्य प्रदेश के सियासी गलियारों में सिंधिया और पायलट की यह मुलाकात चर्चा का केंद्र बनी हुुई है। सचिन पायलट मध्य प्रदेश उपचुनाव को लेकर कांग्रेस के प्रचार अभियान में शामिल होने के लिए ग्वालियर-चंबल क्षेत्र के दो दिवसीय दौरे पर मंगलवार को ग्वालियर पहुंचे। इसी दौरान एयरपोर्ट पर दोनों नेताओं की मुलाकात हुई। रिपोर्ट्स के मुताबिक उस वक्त सिंधिया भोपाल के लिए रवाना हो रहे थे जबकि पायलट तभी ग्वालियर पहुंचे थे।

सिंधिया से जब इस मुलाकात के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, ‘मै पायलट से ग्वालियर में मिला और उनका स्वागत किया। मध्य प्रदेश में सभी का स्वागत करने की परंपरा रही है इसलिए पायलट का यहां स्वागत है।’ यह पूछे जाने पर कि पायलट के मध्य प्रदेश दौरे का उपचुनाव में बीजेपी की संभावनाओं पर कितना असर पड़ेगा, सिंधिया ने जवाब दिया कि लोकतंत्र में सभी को प्रचार करने का अधिकार है। सिंधिया से जब राजस्थान में राजनीतिक संकट से पहले पायलट से उनकी मुलाकात के बारे में पूछा गया तो वे सवालों से बचते नजर आए और कहा कि कांग्रेस के अंदरूनी मामलों में मैं टिप्पणी नहीं करूंगा। बता दें कि सिंधिया के पैटर्न पर ही पायलट ने भी राजस्थान में कांग्रेस से बगावत की थी और अपने विधायकों को लेकर चले भी गए थे। इस दौरान ऐसी खबरें भी आईं कि वे लगातार सिंधिया के संपर्क में रहे। हालांकि, शीर्ष नेतृत्व की पहल के बाद पायलट की घर वापसी हो गई।

पायलट ने नहीं की सिंधिया की आलोचना

सचिन पायलट ने मध्य प्रदेश दौरे के पहले दिन मंगलवार को कांग्रेस के पक्ष में पांच सभाएं कीं। हैरान करने वाली बात यह है कि इस दौरान उन्होंने उपचुनाव में कांग्रेस के प्रमुख विरोधी सिंधिया की आलोचना तो दूर एक भी सभा में उनका नाम तक नहीं लिया। जबकि मध्य प्रदेश में कांग्रेस ने बिकाऊ बनाम टिकाऊ का नारा देकर सिंधिया की गद्दारी को बड़ा चुनावी मुद्दा बनाया है और पार्टी के तमाम नेता उन्हें लगातार निशाना बनाते रहते हैं।  

ये दोस्ती हम नहीं छोड़ेंगे

सिंधिया और पायलट की मुलाकात और दोनों नेताओं का एक दूसरे के प्रति रुख देखकर उनकी पुरानी दोस्ती मध्य प्रदेश के सियासी गलियारों में चर्चा का विषय बन गई है। कहा जा रहा है कि कांग्रेस में रहने के दौरान बेहद करीबी दोस्त कहे जाने वाले दोनों नेताओं के रास्ते आज भले ही अलग हो गए हैं, लेकिन उनकी मित्रता आज भी बनी हुई है। सिंधिया ने पायलट के स्वागत में जैसी बातें कहीं उन्हें इसी का संकेत माना जा रहा है। मध्य प्रदेश के चुनावी माहौल की आपसी तल्खी के बीच सिंधिया के खिलाफ उनके गढ़ में पायलट को प्रचार में उतारना कांग्रेस का बड़ा सियासी दांव माना जाता रहा। लेकिन पायलट ने अपने भाषणों में सिंधिया का ज़िक्र तक नहीं करके शायद यह संकेत दे दिया है कि वे पार्टी के आदेश पर यहां चुनाव प्रचार में उतर भले ही गए हैं, पुरानी दोस्ती का लिहाज अब भी बना हुआ है। सिंधिया ने भी पायलट के बारे में पूछे गए सवालों का जवाब जिस सौहार्द पूर्ण तरीके से दिया, वो भी कुछ ऐसा ही संकेत देता है।

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