December 10, 2022

अन्ना हजारे ने लगाई केजरीवाल को लताड़, बोले- लगता है सत्ता में नशे में डूब गए हो

नई दिल्ली। दिल्ली की शराब नीति अरविंद केजरीवाल और आम आदमी पार्टी के गले की फांस बनी हुई है। एक इस मसले पर बीजेपी लगातार आप पर हमलावर है, वहीं अब अन्ना हजारे ने भी शराब नीति पर खफा होकर दिल्ली सीएम केजरीवाल को चिट्ठी लिख डाली। अरविंद केजरीवाल से अन्ना ने चिट्ठी में कहा है कि, ‘पहले तो बड़ी-बड़ी बातें करते थे, लेकिन उनके आचरण में इसका असर नहीं दिख रहा है। लगता है कि वे शराब के नशे में डूब चुके हैं।’

केजरीवाल को संबोधित पत्र में अन्ना हजारे ने लिखा कि, ‘मुख्यमंत्री बनने के बाद पहली बार मैं आपको खत लिख रहा हूँ। पिछले कई दिनों से दिल्ली सरकार की शराब नीति के बारें में जो खबरे आ रही हैं, वह पढ़कर बड़ा दुख होता हैं। गांधीजी के ‘गाँव की ओर चलो…’ इस विचारों से प्रेरित हो कर मैने अपना पुरा जीवन गाँव, समाज और देश के लिए समर्पित किया हैं। पिछले 47 सालों से ग्राम विकास के लिए काम और भ्रष्टाचार के विरोध में जन आंदोलन कर रहा हूँ। आप लोकपाल आंदोलन के कारण हमारे साथ जुड़ गए। तब से आप और मनिष सिसोदिया कई बार रालेगणसिद्धी गाँव में आ चुके हैं। पिछले 35 साल से गाँव में शराब, बिडी, सिगारेट बिक्री के लिए नहीं है। यह देखकर आप प्रेरित हुए थे और इस बात की प्रशंसा भी की थी।’

अन्ना हजारे ने आगे लिखा कि, ‘राजनीति में जाने से पहले आपने ‘स्वराज’ नाम से एक किताब लिखी थी। इस किताब की प्रस्तावना आपनेस मुझसे लिखवाई थी। इस ‘स्वराज’ नाम की किताब में आपने ग्रामसभा, शराब नीति के बारे में बड़ी बड़ी बाते लिखी थी। आपने कितनी आदर्श बातें लिखी थी। तब आप से बड़ी उम्मीद थी। लेकिन मुख्यमंत्री बनने के बाद आप आदर्श विचारधारा को भूल गए हैं। इसलिए दिल्ली राज्य में आपकी सरकारने नई शराब नीति बनाई। गली गली में शराब की दुकानें खुलवाई जा रही हैं। यह जनता के हित में नहीं हैं। फिर भी आपने ऐसी शराब नीति लाने का निर्णय लिया हैं।’

अन्ना ने आगे लिखा कि, ‘ऐसा लगता हैं कि, जिस प्रकार शराब की नशा होती हैं, उस प्रकार सत्ता की भी नशा होती हैं। आप भी ऐसी सत्ता की नशा में डुब गये हो, ऐसा लग रहा हैं। 10 साल पहले 18 सितंबर 2012 को दिल्ली में टिम अन्ना के सभी सदस्यों की मिटिंग हुई थी। उस वक्त आप ने राजनीतिक रास्ता अपनाने की बात रखी थी। लेकिन आप भूल गए की, राजनीतिक पार्टी बनाना यह हमारे आंदोलन का उद्देश्य नहीं था। उस वक्त टिम अन्ना के बारे में जनता के मन में विश्वास पैदा हुआ था। इसलिए उस वक्त मेरी सोच थी की, टिम अन्ना ने देशभर घुमकर लोकशिक्षण लोकजागृति का काम करना जरुरी था। अगर इस प्रकार लोकशिक्षण लोकजागृति का काम होता तो देश में कही पर भी शराब की ऐसी गलत नीति नहीं बनती।’

अन्ना हजारे के मुताबिक सरकार कौन सी भी पार्टी की हो, सरकार को जनहित में काम करने पर मजबूर करने के लिए समान विचारधारावाले लोगोंका एक प्रेशर ग्रुप होना जरुरी था। अगर ऐसा होता तो आज देश की स्थिती अलग होती और गरीब लोगों को लाभ मिलता। लेकिन दुर्भाग्य से ऐसा नहीं हो पाया। उन्होंने पत्र में केजरीवाल को लिखा कि, ‘दिल्ली सरकार की नई शराब नीति को देखकर अब पता चल रहा है कि, एक ऐतिहासिक आंदोलन का नुकसान कर के जो पार्टी बन गयी, वह भी बाकी पार्टीयों के रास्ते पर ही चलने लगी। यह बहुत ही दुख की बात हैं। भ्रष्टाचार मुक्त भारत के लिए ऐतिहासिक लोकपाल और लोकायुक्त आंदोलन हुआ। लाखों की संख्या में लोग रास्ते पर उतर आये। उस वक्त केंद्र में लोकपाल की जरुरत के बारे में आप मंच से बड़े बड़े भाषण देते थे। लेकिन दिल्ली के मुख्यमंत्री बनने के बाद आप लोकपाल को भुल गए। इतना ही नहीं, दिल्ली विधानसभा में आपने एक सशक्त लोकायुक्त कानून बनाने की कोशिश तक नहीं की।’

उन्होंने सीएम केजरीवाल पर हमला करते हुए लिखा कि, ‘अब तो आपकी सरकार ने लोगों का जीवन बरबाद करनेवाली, महिलाओं को प्रभावित करनेवाली शराब नीति बनाई हैं। इससे स्पष्ट होता है की, आपकी कथनी और करनी में फर्क हैं।आप लोग भी बाकी पार्टियों की तरह पैसा से सत्ता और सत्ता से पैसा इस दुष्टचक्र में फसें हुए दिखाई दे रहें हैं। एक बड़े आंदोलन से पैदा हुई राजनीतिक पार्टी को यह बात शोभा नहीं देती।’