April 21, 2024

कैंसर यूनिट में रिनोवेशन रोका:सिविल सर्जन की चिट्ठी के बाद रोके गए काम

उज्जैन – उज्जैन जिला अस्पताल सहित अन्य सरकारी अस्पतालों में होने वाले निर्माण कार्यों पर रोक लगा दी गई है। इसके बाद कैंसर यूनिट, जिला अस्पताल परिसर में होने वाले अन्य कार्य बंद कर दिए गए हैं और नए कार्य भी अब शुरू नहीं होंगे। जिला अस्पताल परिसर में बनाई जाने वाली क्रिटिकल केयर यूनिट का तो कार्य शुरू होने से पहले ही बंद कर दिया गया। यह यूनिट करीब 50 बेड की बनाई जाना थी, जिस पर करीब 13 करोड़ 30 लाख 16 हजार रुपए खर्च होना थे।
इसके लिए अस्पताल परिसर में बने करीब 25-30 स्वास्थ्यकर्मियों के मकानों को तोड़ा जाकर साइड क्लियर की गई थी। अब सब कुछ जिला अस्पताल परिसर में प्रस्तावित सरकारी मेडिकल कॉलेज सह-मेडीसिटी उज्जैन परियोजना के निर्णय पर निर्भर है। इसमें से मेडीसिटी पर तेजी से कागजी तौर पर कार्य हो रहा है और भेापाल स्तर पर प्रोजेक्ट तैयार किया जा रहा है। मेडीसिटी को एक ही अस्पताल परिसर में बनाया जाएगा। वर्ष 2016 में स्थापित की गई कैंसर यूनिट में भी अब जाकर निर्माण कार्य शुरू हुए थे, जो कि अब रोक दिए गए हैं।
सिविल सर्जन डॉ. पीएन वर्मा ने एनएचएम के कार्यपालन यंत्री, पीडब्ल्यूडी व पथ कार्यालय क्षेत्रीय संचालक स्वास्थ्य सेवाएं को लिखी चिट्ठी में उल्लेख किया है कि जिला अस्पताल के सख्याराजे प्रसूतिगृह कैंसर यूनिट में बिल्डिंग के रिनोवेशन का कार्य अधिकृत निर्माण एजेंसी से करवाया जा रहा है, जिसे अब यथास्थिति में रखा जाए, यानी कार्य को आगे नहीं किया जाएगा। इसमें कार्यालय उपमहाप्रबंधक भवन विकास निगम के पत्र का हवाला दिया गया है।

कारण… जिला अस्पताल परिसर में बनेगी मेडीसिटी प्रस्तावित शासकीय महाविद्यालय यानी सरकारी मेडिकल कॉलेज सह-मेडीसिटी उज्जैन परियोजना के लिए चिह्नित जिला अस्पताल व कैंसर अस्पताल परिसर में विद्यमान भवनों, जिसमें मानचित्र में उल्लेखित साइट-ए, जिला अस्पताल परिसर व साइट-बी कैंसर यूनिट के भवनों को ध्वस्त करने के लिए पात्र-अपात्र भवनों पर विस्तृत रिपोर्ट तलब की गई है।

यह तर्क… पुरानी बिल्डिंग के रिनोवेशन करने का कोई औचित्य नहीं

कार्यों को रोके जाने के लिए पत्र क्रमांक-47 का हवाला दिए जाने के साथ ही सिविल सर्जन डॉ. वर्मा का कहना है कि पुरानी बिल्डिंग का रिनोवेशन किए जाने का कोई औचित्य नहीं है। यह अनावश्यक खर्च है। जिला अस्पताल को सरकारी मेडिकल कॉलेज के अधीन किया जा सकता है व मेडीसिटी भी बनाई जाना प्रस्तावित है। ऐसे में पुराने भवनों में कार्य करवाने की अब आवश्यकता नहीं है। साथ ही नए कार्य भी शुरू नहीं किए जाएंगे।

About Author