October 5, 2022

कमलनाथ सरकार की किसानों को दी गई राहत अब भी है जारी, शिवराज सरकार क्रेडिट लेने की कर रही कोशिश

  • सोयाबीन और मिर्ची की फसल के नुक़सान का तत्काल सर्वे और मुआवजा वितरण की आवश्यकता।

मध्यप्रदेश के कांग्रेस सरकार में मुख्यमंत्री रहे कमलनाथ के प्रयासों का लाभ हालिया मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान उठाने जा रहे हैं। प्रदेश के किसानोंं के खाते में 6 सितम्बर को फसल बीमा का पैसा ट्रांसफर किया जाएगा। जिसकी राशि लगभग पैतालीस हजार करोड़ रुपये है।

सूत्रों के अनुसार फसल बीमा की इस राशि का प्रीमियम 509 करोड़ रुपये अक्टूबर 2019 में कमलनाथ सरकार ने जमा करवाया था। जनता के बीच इस मामले को लेकर कांग्रेस तीखे तेवर अपनाने की तैयारी कर रही है। 

गौरतलब है कि फसल बीमा में 40 प्रतिशत प्रीमियम राशि केंद्र सरकार, 40 प्रतिशत राज्य सरकार एवं 20 प्रतिशत किसान खुद जमा करता है।

कमलनाथ सरकार की राहत अब भी जारी है

कमलनाथ सरकार के दौरान किसानों को मिले फसल बीमा योजना का लाभ के आंकड़े सहित कांग्रेस ने जनता के बीच तथ्य रखने का प्रयास किया है। कांग्रेस सूत्रों के हवाले से बताया गया कि कमलनाथ सरकार की राहत अब भी जारी है। कमलनाथ सरकार ने वर्ष 2019 में ‘ख़रीफ़ फसल बीमा योजना’ के अंतर्गत किसानों के लिये 4614.13 करोड़ रूपये बीमा क्लेम के रूप में स्वीकृत करवाए हैं। उक्त राशि आगामी सप्ताह में किसानों को वितरित की जायेगी।

आंकड़ों के अनुसार 2019 में खरीफ की फसल नुकसानी बीमा के तहत लगभग सवा बीस लाख किसानों को 4614 करोड़ रुपए का बीमा लाभ दिलवाया गया है। कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि उपरोक्त लाभ तत्तकालीन मुख्यमंत्री कमलनाथ के प्रयासों से ही संभव हो पाया है। वर्ष 2019 में अधिक वर्षा के चलते फसलों की हानि हुई थी । उस दौरान कमलनाथ सरकार ने प्राथमिकता के आधार पर सर्वे करवाकर अधिक से अधिक मुआवजा निर्धारित करवाया था । 

शिवराज सिंह चौहान किसानों की चिंता को लेकर वाकई गंभीर हैं तो उन्हें सोयाबीन और मिर्ची की फसल नुकसान का तुरंत सर्वे करवाकर मुआवजा देना चाहिए

किसान पुत्र मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की फसल बीमा को लेकर अगंभीरता की और इशारा करते हुए बताया कि शिवराज सरकार फसल बीमा का राज्यांश को जमा करने में भी एक दो साल की देर करती रही है। शिवराज सरकार पर देरी, हीलाहवाली और लेट लतीफी का आरोप लगाते हुए  कांग्रेस का कहना है कि अगर शिवराज सिंह चौहान किसानों की चिंता को लेकर वाकई गंभीर हैं तो उन्हें सोयाबीन और मिर्ची की फसल नुकसान का तुरंत सर्वे करवाकर मुआवजा देना चाहिए ।