December 7, 2022

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के महासचिव, बेरोजगारी और आर्थिक असमानता पर चिंतित

नई दिल्ली- राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने देश में गरीबी, बेरोजगारी और आर्थिक असमानता को लेकर चिंता जाहिर की है। आरएसएस के सर-कार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने कहा कि गरीबी एक ‘दानव’ जैसी चुनौती की तरह है। उन्होंने गरीबी पर ध्यान दिलाते हुए कहा कि करीब 20 करोड़ लोग गरीबी रेखा से नीचे हैं। उन्होंने इस स्थिति के लिए देश की आर्थिक नीतियों को जिम्मेदार ठहराया है।

स्वदेशी जागरण मंच की ओर से स्वाबलंबी भारत अभियान के तहत आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान दत्तात्रेय होसबाले ने कहा कि कई प्रगति के बावजूद अभी भी कुछ ऐसे क्षेत्र हैं, जहां देश चुनौतियों का सामना कर रहा है। उन्होंने कहा कि गरीबी हमारे सामने एक दानव जैसी चुनौती है। हमारे लिए गरीबी के दानव को मारना जरूरी है। हमें इस बात का दुख होना चाहिए कि 20 करोड़ लोग गरीबी रेखा से नीचे हैं। उन्होंने कहा कि 23 करोड़ से अधिक लोगों की आय 275 रुपये प्रति दिन से भी कम है।

होसबाले ने कहा कि गरीबी के अलावा असमानता और बेरोजगारी दो चुनौतियां हैं जिनसे निपटने की जरूरत है। उन्होंने कहा, देश में चार करोड़ बेरोजगार हैं, जिनमें ग्रामीण क्षेत्रों में 2.2 करोड़ और शहरी क्षेत्रों में 1.8 करोड़ बेरोजगार हैं। उन्होंने कहा कि श्रम बल सर्वेक्षण में बेरोजगारी दर 7.6 प्रतिशत आंकी गई है। हमें रोजगार पैदा करने के लिए न केवल अखिल भारतीय योजनाओं की आवश्यकता है, बल्कि स्थानीय योजनाओं की भी जरूरत है।

होसबाले ने कुटीर उद्योगों को पुनर्जीवित करने तथा ग्रामीण क्षेत्रों में अपनी पैठ बढ़ाने के लिए कौशल विकास क्षेत्र में और अधिक पहल करने का भी सुझाव दिया। होसबाले ने सवाल किया कि क्या यह अच्छा है कि शीर्ष 6 अर्थव्यवस्थाओं में से एक होने के बावजूद, देश की आधी आबादी को कुल आय का केवल 13 प्रतिशत ही मिलता है।

इससे पहले केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने गुरुवार को कहा कि भारत के दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने और एक समृद्ध देश होने के बावजूद इसकी जनसंख्या गरीबी, भुखमरी, बेरोजगारी, जातिवाद, अस्पृश्यता और महंगाई का सामना कर रही है। गडकरी ने नागपुर में एक कार्यक्रम में शिरकत करते हुए कहा कि देश के भीतर अमीर एवं गरीब के बीच की खाई गहरी हो रही है जिसे पाटने की जरूरत है।